वो मेरी थी ही नहीं
By Harsh Kumar · Other
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Category: E-books & Guides
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वो मेरी थी ही नहीं — एक अधूरी कहानी कुछ कहानियाँ प्यार से शुरू नहीं होतीं… बस एक मासूम सी मुलाकात से शुरू होती हैं। एक शादी में पहली बार देखा गया चेहरा, स्कूल की सुबहें, बैडमिंटन के खेल, छोटी-छोटी बातें, अधूरे इंतज़ार और फिर वर्षों बाद उसी इंसान का दोबारा ज़िंदगी में लौट आना। यह कहानी है हर्ष और इरा की—एक ऐसे रिश्ते की, जिसने बचपन की मासूमियत से लेकर जवानी की उम्मीदों तक एक लंबा सफ़र तय किया। कभी दोनों करीब आए, कभी दूर हुए, कभी लगा कि शायद यह रिश्ता हमेशा रहेगा… और फिर कुछ ऐसे सच सामने आए जिन्होंने हर उम्मीद को बदल दिया। “वो मेरी थी ही नहीं” सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है। यह उस एहसास की कहानी है जब हम किसी को पूरी शिद्दत से चाहने के बाद धीरे-धीरे समझते हैं कि चाहना और किसी पर अधिकार होना दो अलग बातें हैं। अगर आपने कभी किसी का इंतज़ार किया है, किसी रिश्ते को बचाने की कोशिश की है, या किसी ऐसे इंसान को खोया है जिसे आप अपना समझते थे—तो शायद इस कहानी के किसी पन्ने पर आपको अपना ही कोई अधूरा हिस्सा मिल जाए। एक कहानी प्यार की, इंतज़ार की, टूटने की… और आखिरकार खुद तक वापस लौट आने की।